गर्भ संस्कार में क्या किया जाता है?HealthPlanet

Posted on Sat 4th Feb 2023 : 11:29

गर्भ संस्कार का मतलब है गर्भावस्था में खुद को भावनात्मक, मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक तौर पर अच्छी स्थिति में रखना, ताकि गर्भ में पल रहे शिशु पर अच्छा प्रभाव पड़े। गर्भ संस्कार के अनुसार, आपका शिशु संगीत और अन्य आवाजों के साथ-साथ आपके विचारों और भावनाओं को पहचाानने और इनके प्रति प्रतिक्रिया करने में सक्षम है। इसीलिए परिवार के बुजुर्ग जोर देते हैं कि गर्भावस्था के दौरान सकारात्मक और तनावमुक्त रहना जरुरी है।

गर्भ संस्कार की परंपरा में किन चीजों का अभ्यास शामिल है-

गर्भावस्था में माँ जितना खुश और सकारात्मक रहे, उतना शिशु के लिए अच्छा है। इसमें मदद करने के लिए गर्भ संस्कार में बहुत से अभ्यास और तरीके बताए गए हैं:

संगीत सुनना
सकारात्मक सोच रखना और तनाव मुक्त रहना
सेहतमंद भोजन खाना
योग करना
ध्यान (मेडिटेशन) और प्रार्थना करना
रचनात्मक कार्य करना
अपने अजन्मे शिशु के साथ बातचीत करना

उपर बताए गए सभी गर्भ संस्कार अभ्यास गर्भ में बच्चे के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद करते हैं। ये अभ्यास माँ को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ भी रखते हैं और गर्भावस्था को एक यादगार अनुभव बनाते हैं।

आपने शायद किसी गर्भवती महिला को अपने पेट पर हाथ फेरते या गर्भ में पल रहे शिशु से बात करते हुए देखा होगा और आपको शायद यह अजीब भी लगा होगा। मगर, हो सकता है वह ऐसा इसलिए कर रही हों क्योंकि वे गर्भ संस्कार का अभ्यास कर रही हैं।

क्या मेरी भावनाओं और विचारों का असर मेरे गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है?
माना जाता है कि गर्भ में शिशु का मस्तिष्क 60 प्रतिशत तक विकसित हो जाता है। यह बात भी अब और अधिक स्पष्ट होती जा रही है कि अजन्मा शिशु आवाज, रोशनी और हलचल जैसे बाहरी प्रभावों के प्रति प्रतिक्रिया करने में सक्षम है। हालांकि, आपको अपने शिशु के विकास को बढ़ावा देने के सक्रिय प्रयास करने चाहिए या नहीं और इसका क्या असर होगा, इस बारे में राय अलग-अलग है।

परंपरागत रूप से माना जाता है कि यदि आप खुश रहें और ऐसी चीजें करें जो आपको शांत और संतुष्ट रखें, तो यह सब आपके गर्भस्थ शिशु पर सकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए, उदाहरण के तौर पर, यदि आप गर्भावस्था में कोई कॉमेडी फिल्म देखती हैं, और इसे देखकर आप खुश और प्रफुल्लित महसूस करती हैं, तो माना जाता है कि आपकी यह खुशी और सकारात्मक भावना कुछ हद तक शिशु तक भी पहुंचती है। इस तरह के सकारात्मक अनुभव शिशु के शुरुआती व्यक्तित्व को रचनात्मक तरीके से आकार देने में मदद कर सकते हैं। इस तरह के अनुभवों से शायद वह एक संतुष्ट और खुशमिजाज़ व्यक्ति बन सकेगा।

चाहे यह वैज्ञानिक रूप से सच हो या न हो, मगर यह निश्चित रूप से आपको खुशी और संतुष्टी अवश्य देगा। इस तरह आपने अपने शिशु के साथ पहले से ही एक प्यार भरा बंधन बना लिया होगा और साथ ही उसके जन्म लेने के लिए एक शानदार माहौल भी होगा।
गर्भ संस्कार में किस तरह का संगीत सुनना चाहिए?
आपका गर्भस्थ शिशु सातवें महीने के बाद से आवाजों को सुन सकता है और उनके प्रति प्रतिक्रिया दे सकता है। इसलिए यदि आप संगीत सुन रही हैं, तो संभावना है कि वह भी इसे सुन रहा होगा। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत सुनने से आपके बच्चे के मस्तिष्क का विकास होगा और साथ ही उसकी सुनने की क्षमता भी विकसित होगी।

आप सितार, बांसुरी या वायलिन जैसे वाद्ययंत्रों की सुरीली धुनें सुन सकती हैं। आप गर्भावस्था के श्लोकों का जाप भी कर सकती हैं या अपने शिशु को गाने गाकर सुना सकती हैं। आप पारंपरिक रागों पर आधारित हमारे गर्भावस्था के श्लोकों को सुन सकती हैं, जो गर्भवती मांओं के लिए शांति देने वाला संगीत हैं। बहुत से म्यूजिक स्टोर में विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए बनाया गया संगीत उपलब्ध होता है। गर्भ में पल रहे शिशु को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ, संगीत सुनना आपके लिए भी तनाव कम करने का बेहतरीन तरीका हो सकता है।
पूरी गर्भावस्था के दौरान मैं खुद को तनावमुक्त और सकारात्मक कैसे रख सकती हूं?
चाहे कोई इंसान कितना भी खुशमिजाज़ हो, मगर उनके भी उदासी भरे दिन होते हैं या वे भी तनाव और चिंता के शिकार होते हैं। गर्भावस्था के दौरान हार्मोनों का बढ़ा हुआ स्तर आपको सामान्य से अधिक भावुक बना सकता है। इसलिए भले ही आप प्रेगनेंसी में पूरे समय खुश और तनाव मुक्त रहना चाहें, लेकिन आपके मनोभावों में उतार-चढ़ाव रह सकता है।

आप खुद को खुश रखने के लिए ऐसी चीजों के बारे में सोचे जो आपको पसंद हों और उनके लिए समय निकालने की पूरी कोशिश करें। अपनी पहली गर्भावस्था में ऐसा करना आपके लिए आसान होगा।

अगर आपके पास अपनी रुचि या शौक पूरा करने के लिए समय नहीं है, तो किताबें पढ़ने या अच्छी फिल्म देखने से भी आपका मन बहल सकता है। गर्भ संस्कार के अनुसार, माना जाता है कि गर्भावस्था के दौरान शिक्षाप्रद किताबें पढ़ने से बच्चे तक भी इसका ज्ञान पहुंचता है। इसलिए सदियों से गर्भवती महिलाओं को पौराणिक कहानियों और शास्त्रों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा है, ताकि उनके बच्चों को अच्छे नैतिक मूल्य मिल सकें।

यदि आप कुछ और आधुनिक चाहती हैं, तो कुछ अन्य किताबें पढ़ सकती हैं। आप वह पढ़ें जिससे आपको खुशी मिलती हो, चाहे फिर वह खाना बनाने के बारे में हो, रोमांस हो, नर्सरी राइम या परियों की कहानियां हों। सुखद अंत वाली एक अच्छी कॉमेडी फिल्म भी आपके मूड को अच्छा कर सकती है। इस तरह के सकारात्मक अनुभव शिशु के शुरुआती व्यक्तित्व को रचनात्मक तरीके से आकार देने में मदद कर सकते हैं। इस तरह के अनुभवों से शायद वह एक संतुष्ट और खुशमिजाज़ व्यक्ति बन सकेगा।

आप अपने जीवन के अच्छे पलों को याद कर सकती हैं, या छुट्टी पर जा सकती हैं और प्रकृति के मनोहर दृश्यों का आनंद ले सकती हैं। या आप अपने आस-पास अपने प्रियजनों की तस्वीरें लगा सकती हैं।

यदि आप अपने जीवन में कठिन दौर से गुजर रही हैं, तो तनाव से निपटने में मदद के लिए हमारे कुछ सुझावों को आजमा सकती हैं।
गर्भ संस्कार के अनुसार किस तरह के भोजनों का सेवन अच्छा है?
गर्भ संस्कार गर्भावस्था के दौरान सात्विक आहार या शुद्ध आहार के सेवन की सलाह देते हैं। इसका मतलब है कि केवल ताजी सब्जियों से बना ताजा खाना ही खाना है। इसका मतलब संयम से खाना भी है। सात्विक व्यंजन वह है जिसमें जरुरी पोषक तत्व संतुलित मात्रा में होते हैं। सात्विक भोजन में भी सभी प्रकार के स्वाद भी होते हैं - मीठा, कड़वा, खट्टा, नमकीन, तीखा और कसैला। सात्विक आहार का मतलब मसालेदार, किण्वित और प्रिजर्वेटिव वाले भोजन से परहेज करना भी है।

माना जाता है कि ऐसा आहार आपको और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ और शुद्ध रखेगा। बेशक, अगर आपको चॉकलेट खाने की इच्छा हो, तो कभी-कभार इसका सेवन करने में कोई हर्ज नहीं है! गर्भावस्था के दौरान क्या खाना चाहिए, इसके बारे में अधिक जानने के लिए हमारा गर्भावस्था में पोषण अनुभाग देखें।

अपने आहार में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले अपनी डॉक्टर से बात करें। यदि आपको आहार योजना बनाने में मदद चाहिए तो हमारा लेख पढ़ें।
गर्भावस्था के दौरान योग करना गर्भ संस्कार का हिस्सा क्यों है?
माना जाता है कि गर्भावस्था में योग करने के निम्नांकित फायदे हैं:

इससे मांसपेशियों का लचीलापन बढ़ेगा, जो प्रसव के दौरान काफी काम आएगा।
आपके रक्त परिसंचरण में सुधार आएगा, जो गर्भावस्था से जुड़े पीठ दर्द और टांगों में ऐंठन कम करने में मदद करेगा।
गर्भावस्था और प्रसव के दौरान दर्द सहने की क्षमता बढ़ाएगा।
वजन नियंत्रित रखने में मदद करेगा।

इससे आपको शांति और आराम मिलेगा। योग की प्राणायाम और श्वसन तकनीकों से विशेषतौर पर आराम मिलता है।
प्रेगनेंसी में ध्यान लगाना और प्रार्थना किस तरह मदद करती हैं?
ध्यान (मेडिटेशन,) योग और गर्भ संस्कार का एक अभिन्न हिस्सा है। इससे मन की शांति मिलती है और एकाग्रता में भी सुधार होता है। इनका अभ्यास करने से आप अपने शिशु की भी उसी तरह मदद कर रही हैं। आप उसे तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी शांत रहने की क्षमता विकसित करने में मदद कर रही हैं।

मेडिटेशन में 'मन को शून्य अवस्था' में लाने का प्रयास किया जाता है। ऐसा तब होता है जब आप कुछ भी नहीं सोच रही होती और आपका दिमाग खाली होता है। जब आप ध्यान लगाने की कोशिश करें, तो मन में अपने बच्चे की कल्पना कर सकती हैं और प्रत्येक सांस के साथ उन सभी अद्भुत अनुभवों के बारे में सोचें, जिन्हें आप उसके साथ साझा करना चाहती हैं। कई मांओं को लगता है कि यह प्रक्रिया उन्हें खुशी देती है और उन्हें अपने गर्भस्थ शिशु के साथ बेहतर ढंग से जुड़ने में मदद करती है।

प्रार्थना और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियां गर्भ संस्कार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। माना जाता है कि ये आपके बच्चे के आध्यात्मिक विकास में मदद करते हैं। कुछ ऐसे मंत्र और श्लोक हैं जो विशेष रूप से अजन्मे बच्चे के लिए पढ़े जाते हैं। इनमें शिशु को बुद्धि, अच्छा स्वास्थ्य, खुशी और नैतिक मूल्यों जैसे गुणों का आशीर्वाद देने की प्रार्थना शामिल होती है। गर्भवती माँ और उसके बच्चे की सुरक्षा के लिए आप हमारे गर्भावस्था के श्लोक सुन सकती हैं।

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